यूपी में लापरवाही बरतने पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल निलंबित

यूपी में लापरवाही बरतने पर मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल निलंबित

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सहारनपुर के शेख-उल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल दिनेश कुमार सिंह मटोलिया को लापरवाही बरतने की वजह से निलंबित कर दिया है।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने सहारनपुर के शेख-उल हिंद मौलाना महमूद हसन मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल दिनेश कुमार सिंह मटोलिया को लापरवाही बरतने की वजह से निलंबित कर दिया है। उनकी जगह अब मेरठ के नेशनल मेडिकल कॉलेज के डॉ अरविंद त्रिवेदी लेंगे।

जब राज्य में ऑक्सीजन की कमी हो रही थी उस दौरान मेडिकल कॉलेज में लगभग 40 सिलेंडर खराब वाल्व के कारण अलग पड़े मिले थे।
मेडिकल कॉलेज के पास 300 सिलिंडर हैं, जिनमें से 40 खराब स्थिति में थे।
सरकार के प्रवक्ता के अनुसार, "उनपर आरोप लगाए हैं कि अस्पताल को ऑक्सीजन की सुचारू आपूर्ति को लेकर सरकार के सख्त निदेशरें के बावजूद भी 300 में से 40 सिलेंडरों के वाल्व काम नहीं कर रहे, जिसकी वजह से सब बेकार पड़े थे। पूछताछ के दौरान, ऑक्सीजन आपूर्ति प्रभारी नवाब सिंह और गैस आपूर्तिकर्ता कंपनी ने जिला प्रशासन को सूचित किया कि वे दिनेश सिंह को वाल्व की मरम्मत के लिए नियमित रूप से याद दिला रहे थे, लेकिन उन्होंने इस पर कार्रवाई नहीं की।"

यह भी आरोप लगाया गया कि दिनेश सिंह ने रात में अपने सेल फोन को बंद कर दिया और तत्काल मामलों में निर्णय लेने में देरी कर रहे थे। प्रवक्ता ने कहा कि जांच में पाया गया कि कॉलेज के प्रिंसिपल और विभिन्न विभागों के बीच बहुत समन्वय नहीं था।

प्रवक्ता ने कहा, प्रशासन के सख्त आदेश के बावजूद भी आरटी-पीसीआर परीक्षण रिपोर्ट लगभग 5,000 मामलों की कॉलेज की प्रयोगशाला के पास लंबित पड़ी है।

यूपी के स्वास्थ्य विभाग ने स्थिति का जायजा लेते हुए अपने आदेश में कहा, "प्रिंसिपल को केवल ऑक्सीजन सिलेंडर की मरम्मत में ही नहीं बल्कि आरटी-पीसीआर (कोविड परीक्षण) रिपोर्ट में बहुत अधिक विलंब के कारण भी दोषी पाया गया है।

जांच में पता चला कि कम से कम 5,000 आरटी-पीसीआर रिपोटरें के परिणाम 20 अप्रैल से अधूरे पड़े थे।"

सहारनपुर में इस समय 3,000 से ज्यादा लोग कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। इसी के साथ राज्य में रोजाना 30,000 से ज्यादा संक्रमित मामले सामने आ रहे हैं।

अभी तक तमाम प्रयासों के बावजूद निलंबित पिं्रसिपल की टिप्पणियां नहीं हासिल हो सकी हैं।

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