आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जिला प्रशासन को जौहर यूनिवर्सिटी को छोड़ने के आदेश

जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने आजम खां की याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि 10 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खां को अंतरिम जमानत देते हुए जौहर विश्वविद्यालय परिसर के एक हिस्से की संपत्ति का कब्जा लेने के लिए कहा था।
आजम खान को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, जिला प्रशासन को जौहर यूनिवर्सिटी को छोड़ने के आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने सपा नेता आजम खां को बड़ी राहत देते हुए हाईकोर्ट से मिली सशर्त जमानत को नियमित में बदल दिया। साथ ही जौहर विश्वविद्यालय परिसर के सील हिस्से को दोबारा खोलने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के जौहर विश्वविद्यालय परिसर के एक हिस्से का कब्जा लेने वाले आदेश को दरकिनार कर दिया।

जस्टिस एएम खानविलकर की पीठ ने आजम खां की याचिका पर सुनवाई के दौरान पाया कि 10 मई को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खां को अंतरिम जमानत देते हुए जौहर विश्वविद्यालय परिसर के एक हिस्से की संपत्ति का कब्जा लेने के लिए कहा था। जस्टिस खानविलकर ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा, जमानत याचिका पर इस तरह की शर्तें कैसे लगाई जा सकती हैं। आजकल ऐसा दिख रहा है कि हाईकोर्ट मामले से इतर टिप्पणी या जमानत की शर्तें लगा रहे हैं। पिछले हफ्ते भी ऐसा एक मामला सुप्रीम कोर्ट में आया था।

आजम खां पर लादी गई शर्त पर पीठ ने कहा, जमानत याचिका पर विचार करते हुए हाईकोर्ट को अपनी इस शक्ति का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए था। पीठ ने यह भी कहा कि हाईकोर्ट को जमानत संबंधी मामले पर विचार करना चाहिए था। जवाब में एएसजी राजू ने कहा कि जमानत की कार्यवाही के दौरान खां ने खुद को उस संपत्ति से नाता नहीं होने की बात कही थी। वह आजम खां की निजी संपत्ति नहीं है। जवाब में पीठ ने कहा कि आप यह आदेश किसी अन्य कार्यवाही में दे सकते हैं, यहां हम जमानत आदेश की बात कर रहे हैं।

हाईकोर्ट का कोई दूसरा जज मामले में करे सुनवाई
जस्टिस खानविलकर ने मामले को हाईकोर्ट वापस भेजने और किसी अन्य जज द्वारा इस मामले पर विचार करने की बात कही। इस पर यूपी सरकार की ओर से पेश एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू ने कहा, ऐसा करना उचित नहीं होगा। इससे जज की ‘विश्वसनीयता’ पर सवाल उठेगा। जस्टिस खानविलकर ने पलटवार करते हुए कहा, अगर ऐसा होता है तो होने दीजिए। यह नया ट्रेंड बन गया है, जो ठीक नहीं है।

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