लखनऊ: छोटे घल्लू घारे में शहीद हुए सिक्खों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गये

कहनुवां में सिख संगत द्वारा एक गुरुद्वारा एवं स्मारक स्थापित किया गया है। दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष स0 राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने छोटे घल्लू घारे में शहीद हुए सिक्खों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये।
लखनऊ: छोटे घल्लू घारे में शहीद हुए सिक्खों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गये
Photo by Dheeraj Dhawan

शासन द्वारा जारी कोविड-19 की गाइडलाइन के अनुसार श्री गुरू सिंह सभा, ऐतिहासिक गुरूद्वारा नाका हिंडोला, लखनऊ में सरबत के भले की अरदास एवं छोटे घल्लू घारे में शहीद हुए सिक्खों को श्रद्धा सुमन अर्पित किए गये।

प्रातः का दीवान 6.00 बजे श्री सुखमनी साहिब जी के पाठ से प्रारम्भ हुआ जो 10.30 बजे तक चला जिसमें रागी जत्था भाई राजिन्दर सिंह जी ने अपनी मधुरवाणी में -

सतिगुर की सेवा सफल है जे को करे चितु लाइि।

नामु पदारथु पाईऐ अचिंतु वसै मनि आइ।

जनम मरन दुखु कटिअै हउमै ममता जाइि।

उत्तम पदवी पाइीअै सचे रहै समाइि।

नानक पूरब जिन कउ लिखिआ तिना सतिगुरु मलिआ आइि।।

शबद कीर्तन गायन किया।

उसके उपरान्त मुख्य ग्रन्थी ज्ञानी सुखदेव सिंह जी ने छोटे घल्लू घारे में शहीद हुए सिक्खों को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए कहा कि दरबार साहिब की बेअदबी करने वाले मस्सा रंगड़ (एक मुगल सेनापति) को दो सिख योद्धाओं भाई सुखा सिंह और भाई मेहताब सिंह द्वारा दंडित किया गया था।

इसने वास्तव में 1740 के दौरान गहरे जंगलों में छिपे सिखों का मनोबल बढ़ाया। मुगल शासक सिखों को किसी भी कीमत पर खत्म करने के लिए तैयार थे।

दीवान लखपत राय और दीवान जसपत राय, मुगल गवर्नर याहिया खान के साथ दरबारी भाई सिखों को खत्म करने में अधिक सक्रिय थे।

गुजरांवाला के पास सिखों के साथ ऐसी लड़ाई में जसवंत राय मारा गया। अपने भाई की मृत्यु से बहुत चिढ़कर लखपत राय ने सिखों को पकड़ने के लिए हर तरह का इस्तेमाल किया, उन्हें लाहौर लाया, क्रूरतापूर्वक अत्याचार किया और गुरुद्वारा शहीद गंज साहिब के नाम से जाना जाने वाला स्थान पर मौत की सजा दी)।

परेशानी और अपनी शक्ति को भांपते हुए सिख कहनुवां से शुरू होकर ब्यास नदी के घने घने जंगलों में चले गए। लखपत राय के साथ मुगलों की बड़ी सेना थी, उसने पूरे क्षेत्र को घेर लिया।

सिखों ने कुछ समय तक विरोध किया और फिर ब्यास की नदी पट्टी की ओर बढ़ गए। सिखों को भागने से रोकने के लिए मुगल सेना ने जंगल में आग लगा दी। हर जगह भयंकर युद्ध हुआ।

लगभग 7000 सिख शहीद हुए और 3000 को मुगल सेना ने पकड़ लिया। पकड़े गए सिखों को लाहौर लाया गया, सड़कों पर परेड किया गया और फिर मौत के घाट उतार दिया गया। कहनुवां में सिखों के नरसंहार को छोटा प्रलय (छोटा घल्लूघारा) के रूप में जाना जाता है।

कहनुवां (गुरदासपुर) में सिख संगत द्वारा एक गुरुद्वारा एवं स्मारक स्थापित किया गया है। दीवान की समाप्ति के उपरान्त लखनऊ गुरूद्वारा प्रबन्धक कमेटी के अध्यक्ष स0 राजेन्द्र सिंह बग्गा जी ने छोटे घल्लू घारे में शहीद हुए सिक्खों को श्रद्धा सुमन अर्पित किये और नगरवासियों से अपील की शासन द्वारा जारी कोविड-19 की गाइडलाइन का पालन करते हुए घरों में गुरु की बाणी का पाठ एवं सिमरन करें।

कार्यक्रम का संचालन स0 सतपाल सिंह ‘‘मीत’’ जी ने किया। उसके उपरान्त गुरू का कड़ाह प्रसाद संगत में वितरित किया गया।

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