उत्तर प्रदेश: योगी सरकार की एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा और रफ़्तार

उत्तर प्रदेश: योगी सरकार की एक्सप्रेस-वे परियोजनाओं से प्रदेश के विकास को मिलेगी नई दिशा और रफ़्तार

उत्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास में अगर कुछ सबसे ज्यादा सहायक और महत्वपूर्ण है तो वो है प्रदेश की आधारभूत संरंचना, जिसका अभिन्न हिंसा हैं यहाँ की सड़कें और राष्ट्रीय राजमार्ग।

उत्त्तर प्रदेश के सर्वांगीण विकास में अगर कुछ सबसे ज्यादा सहायक और महत्वपूर्ण है तो वो है प्रदेश की आधारभूत संरंचना, जिसका अभिन्न हिंसा हैं यहाँ की सड़कें और राष्ट्रीय राजमार्ग। योगी सरकार अपने साशन की शुरआत से ही राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पैर खासा बल दे रही है। उत्तर प्रदेश देश का अकेला ऐसा राज्य है जहाँ एक साथ 4 -4 एक्सप्रेसवे का निर्माण कार्य चल रहा है।

योगी सरकार की इन महत्वकांक्षी परियोजनाओं से जहाँ एक तरफ प्रदेश में निवेश और रोज़गार के अवसर बढ़गे वहीँ दूसरी ओर आर्थिक खुशहाली भी आएगी।

उत्तर प्रदेश सरकार ने इन परियोजनाओं के लिए यूपी औद्योगिक क्षेत्र विकास अधिनियम 1976, के तहत "उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण" (यूपीईआईडीए) नामक एक प्राधिकरण की भी स्थापना की है।

फिलहाल उत्तेर प्रदेश में, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे (Bundelkhand Expressway), पूर्वांचल एक्सप्रेसवे (poorwanchal Expressway ), गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे (Gorakhpur Link Expressway) और गंगा एक्सप्रेस वे का निर्माण कार्य ज़ोरों शोरों पर चल रहा है।

लखनऊ से गाजीपुर को जोड़ने वाला निर्माणाधीन 340 किलोमीटर लंबा पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे प्रदेश के दो बड़े शहरों को आपस में जोड़ेगा। इस एक्सप्रेसवे से पूर्वांचल में आर्थिक समृद्धि आएगी।

पूर्वी यूपी में एक्सप्रेसवे, कवर किए गए क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक विकास के साथ-साथ कृषि, वाणिज्य, पर्यटन और उद्योगों की आय को भी बढ़ावा देगा। पूर्वी यूपी में ये एक्सप्रेसवे हथकरघा उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों, भंडारण संयंत्र, मंडी और दूध आधारित उद्योगों की स्थापना के लिए उत्प्रेरक का काम करेगा।

हालाँकि इस परियोजना में कई चुनौतियां थी लेकिन योगी प्रशाशन ने इसे कुशलतापूर्वक और प्रभावी ढंग से संभाला और परियोजना में न्यूनतम निविदा अनुमानित लागत से लगभग 5.19% कम हो गई, जिससे UPEIDA को लगभग 614 करोड़ रुपये का लाभ हुआ।

UPEIDA के सीईओ और गृह मामलों के अतिरिक्त मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी ने इस साल पूर्वांचल एक्सप्रेसवे को पूरा करने के लिए 15 अक्टूबर का लक्ष्य रखा है। इसका निर्माण अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ, और महामारी के कारण देरी के बावजूद 36 महीने की निर्धारित समय सीमा के भीतर समाप्त होने के लिए तैयार है।

योगी सरकार को इन परियोजनाओं से होने वाली लाभों के बारे में भली भांति ज्ञान है और अपनी दूर दृष्टि के कारण ही आज राज्य सरकार इन एक्सप्रेसवे थे निर्माण कर रही है। परियोजनाओं से प्रदेश में निवेश और रोज़गार कई गुना बढ़ जायेगा। हालाँकि कई लोग इन परियोजनाओं को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेसवे के एक जवाब के रूप में भी देखते हैं, जिसे समाजवादी पार्टी की सरकार द्वारा बनाया गया था।

निर्माणाधीन सभी चारों एक्सप्रेसवे पूर्वांचल एक्सप्रेस वे, गंगा एक्सप्रेसवे, गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे और बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे पर काम बड़ी तेज़ी से चल रहा है। अगले साल के विधानसभा चुनावों में इन परियोजनाओं का सीधा फायदा योगी सरकार को मिल सकता है।

पूर्वांचल एक्सप्रेसवे उन जिलों को जोड़ता है जिन्हें अक्सर पूर्वांचल की जीवन रेखा कहा जाता है, जो कई पिछड़ी जातियों और दलित समुदायों के घर हैं। इस परियोजना का शिलान्यास स्वयं प्रधानमंत्री मोदी ने जुलाई 2018 में किया था, उस समय मोदी ने कहा था, 'जब तक पूर्वांचल का विकास नहीं होगा, नए भारत का सपना अधूरा रहेगा।' इसका सीधा असर दस महीने बाद, 2019 के लोकसभा चुनावों के नतीजे में भी भाजपा को देखने को मिला था। जिसने जिले की 25 में से 20 सीटें जीती थीं।

फिलहाल योगी सरकार की इन परियोजनाओंका सीधा असर प्रदेश के विकास की गति पर पड़ेगा। सूत्रों के अनुसार पूर्वांचल एक्सपेलसवाय का उद्घाटन प्रधानमंत्री कर सकते हैं। कुल मिलाकर योगी सरकार की चरों एक्सप्रेसवे परियोजनाओं से उत्तर प्रदेश के विकास को नई दिशा और रफ़्तार दी जा सकेगी।

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