Air India को मई-जून में मिल सकते हैं नए खरीदार

Air India को मई-जून में मिल सकते हैं नए खरीदार

एयर इंडिया के बहुप्रतीक्षित निजीकरण के इस साल की पहली छमाही में पूरा होने की संभावना है। शुक्रवार को यहां टाइम्स नेटवर्क इंडिया इकनॉमिक कॉन्क्लेव में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि...

एयर इंडिया के बहुप्रतीक्षित निजीकरण के इस साल की पहली छमाही में पूरा होने की संभावना है।

शुक्रवार को यहां टाइम्स नेटवर्क इंडिया इकनॉमिक कॉन्क्लेव में केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि राष्ट्रीय विमान कंपनी के लिए वित्तीय बोलियां मई में किसी भी समय प्रस्तुत की जाएंगी। उन्होंने कहा कि गुरुवार को एक बैठक में वित्तीय बोलियां प्रस्तुत करने की समयसीमा तय की गई थी।

उन्होंने कहा, "गुरुवार को एक बैठक हुई थी। उन्होंने तय किया है कि वित्तीय बोलियां 64 दिनों के अंदर शुरू की जानी हैं..वित्तीय बोलियां मई में किसी भी समय होंगी..इसके बाद निर्णय लेने और एयरलाइन को सौंपने का प्रश्न है।"

उन्होंने कहा कि निजीकरण के पहले के प्रयास सफल नहीं हुए क्योंकि प्रयास "आधे-अधूरे मन" किए गए थे।

सूत्रों के अनुसार, एयरलाइन ने लंबे समय तक किसी भी खरीदार को आकर्षित नहीं किया, टाटा संस और स्पाइसजेट के प्रमोटर अजय सिंह संभावित बोलीदाताओं के रूप में सामने आए।

इसके अलावा, रिपोटरें से पता चलता है कि अजय सिंह ने रास अल खैमाह इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और दिल्ली स्थित बर्ड ग्रुप के प्रमोटर अंकुर भाटिया के साथ मिलकर एयर इंडिया की बोली लगाने के लिए साझेदारी की है।

डीआईपीएएम के सचिव तुहिन कांत पांडे ने पहले कहा था कि सरकार को एयर इंडिया के रणनीतिक विनिवेश के लिए इच्छुक कई अभिव्यक्ति मिली हैं।

प्रक्रिया को दो चरणों में विभाजित किया गया है। पहले चरण में, इच्छुक बोलीकर्ताओं द्वारा एंच्छिक अभिव्यक्तियां प्रस्तुत की गई हैं और उन्हें प्रारंभिक सूचना ज्ञापन (पीआईएम) में वर्णित पात्रता मानदंड और अन्य शर्तों के आधार पर सूचीबद्ध किया जाएगा।

चरण दो में, शॉर्टलिस्ट किए गए इच्छुक बोलीदाताओं को अनुरोध प्रस्ताव (आरएफपी) प्रदान किया जाएगा और उसके बाद पारदर्शी बोली प्रक्रिया होगी।

गौरतलब है कि एयर इंडिया के 209 कर्मचारियों के एक समूह ने भी बोली लगाई थी। डनलप और फाल्कन टायर्स के एस्सार और पवन रुइया ने भी एयर इंडिया के लिए बोली लगाई थी।

एयर इंडिया का निजीकरण पहले ही कई बाधाओं का सामना कर चुका है। कोविड-19 महामारी से उत्पन्न स्थिति को देखते हुए ईओआई जमा करने की अंतिम तिथि 14 दिसंबर, 2020 तक बढ़ा दी गई थी।

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