न्यूज सब्सक्रिब्शंस के नए फीचर के साथ यूजर्स को लुभा रहा फेसबुक

न्यूज सब्सक्रिब्शंस के नए फीचर के साथ यूजर्स को लुभा रहा फेसबुक

फेसबुक एक ऐसे नए फीचर पर काम कर रहा है जिससे आप अपने अकाउंट को भुगतान किए गए न्यूज सब्सक्रिप्शन के साथ लिंक कर सकेंगे ताकि इन्हें पढ़ने के लिए आपको दोबारा लॉगिन करने या पेवॉल पर क्लिक करने की जरूरत न पड़े।

फेसबुक एक ऐसे नए फीचर पर काम कर रहा है जिससे आप अपने अकाउंट को भुगतान किए गए न्यूज सब्सक्रिप्शन के साथ लिंक कर सकेंगे ताकि इन्हें पढ़ने के लिए आपको दोबारा लॉगिन करने या पेवॉल पर क्लिक करने की जरूरत न पड़े। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के इस नए फीचर से 2.7 अरब यूजर्स लाभान्वित होंगे। एक बार इस फीचर के लागू हो जाने से लिंक्ड सब्सक्राइबर्स को किसी आर्टिकल वगैरह को पढ़ने के लिए बार-बार लॉगिन करने के झंझट से आजादी मिलेगी और इसी तरह से पेवॉल का भी सामना नहीं करना पड़ेगा।

कंपनी की तरफ से उठाया जा रहा यह कदम ऐप्पल न्यूज प्लस, फ्लिपबोर्ड, गूगल न्यूज व सीएनएन न्यूज एग्रीगेटर जैसे प्लेटफॉर्म को एक ललकार है। फिलहाल अधिकतर बड़े-बड़े समाचार संगठनों के अपने पेवॉल है जिससे उनकी सदस्यता के बाहर लोग नहीं पढ़ पाते हैं। अपने व्यवसाय में अधिक लाभ के चलते ये सब्सक्रिप्शंस की संख्या को अधिक बढ़ाने पर ज्यादा गौर फरमाते हैं।

फेसबुक पर प्रोडक्ट मार्केटिंग मैनेजर स्टीफन लार्जेन के मुताबिक, कंपनी इस नए फीचर का परीक्षण करने के लिए दुनिया भर के तमाम पब्लिशर्स संग गठजोड़ कर रहा है। यह यूजर्स को फेसबुक पर अपने समाचार सदस्यता खातों को लिंक करने की अनुमति देता है।

लार्जेन ने अपने ब्लॉग पोस्ट पर कहा, "फीचर का मकसद पब्लिशर्स का अपने सब्सक्राइबर्स संग रिश्ते को गहरा बनाने में उनकी मदद करना और साथ ही इन सब्सक्राइबर्स को फेसबुक पर अधिक से अधिक समाचारों के पढ़ने के उनके अनुभव को भी बेहतर बनाना है।"

कंपनी के मुताबिक, जून के महीने में एक परीक्षण के दौरान जिन सब्सक्राइबर्स ने अपने अकाउंट्स को लिंक किया, वे उन लोगों के मुकाबले औसतन 111 फीसदी अधिक आर्टिकल पर क्लिक किए, जो टेस्ट ग्रुप का हिस्सा नहीं रहे। इन सब्सक्राइबर्स के पब्लिशर को फॉलो करने की दर में 97 फीसदी तक की वृद्धि आई, जो पहले महज 34 फीसदी थी। इससे पता चलता है कि जब सब्सक्राइबर्स ने अपने अकाउंट्स को समाचार प्रकाशकों संग जोड़ा, तो उन्हें पहले से अधिक कंटेंट दिखने लगे।

फिलहाल, अमेरिका में अटलांटा जर्नल-कॉन्स्टिट्यूशन, द एथलेटिक और द विनीपेग फ्री प्रेस ऐसे कुछ अखबार हैं, जो इस फीचर को अपनाने की दिशा में काम कर रहे हैं।

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