Harley Davidson विदेशों में टॉप, भारत में ठप्प! कुछ ही सालों में बंद होने की कगार पर..जानें क्या है बड़ा कारण?
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Harley Davidson विदेशों में टॉप, भारत में ठप्प! कुछ ही सालों में बंद होने की कगार पर..जानें क्या है बड़ा कारण?

अमेरिका की दिग्गज मोटरसाइकिल कंपनी हार्ले-डेविडसन (Harley Davidson) ने भारत में अपना कारोबार बंद करने की घोषणा की है. हार्ले के इस कदम के चलते भारत में कंपनी के लगभग 70 कर्मचारियों की नौकरी जाएगी।

अमेरिका की दिग्गज मोटरसाइकिल कंपनी हार्ले-डेविडसन (Harley Davidson) ने भारत में अपना कारोबार बंद करने की घोषणा की है. कंपनी ने पिछले साल ग्लोबल रिस्ट्रक्चरिंग इनिशिएटिव्स का ऐलान किया था. इसके तहत उन देशों में कारोबार बंद किया जाना था जहां कंपनी की बिक्री और मुनाफा कम है. भारत में कारोबार समेटना भी इसी रणनीति का हिस्सा है.


हालांकि, लॉन्च के बाद हार्ले डेविडसन के लिए शुरूआती कुछ साल उम्मीद से भरे हुए थे. उस वक्त के एमडी अनूप प्रकाश भारतीय बाजार को लेकर उत्साह में दिखते थे. असल में तब भारत में सुपर बाइक का दौर शुरू नहीं हुआ था.

सुपर बाइक के तौर पर तब सड़कों पर सुजुकी की 'हायाबुसा' ही कभी-कभार नजर आती थी. हार्ले डेविडसन को भी एक बाइक बनाने वाली मजबूत और संभावनाशील कंपनी के तौर पर देखा गया. ऐसा लगा कि कंपनी का इरादा भारत में लंबी रेस का घोड़ा बनने का है.

हार्ले डेविडसन ने असेम्बलिंग के लिए हरियाणा के बावल में अपनी यूनिट स्थापित की. यह बड़ी बात थी क्योंकि तब ऐसी बड़ी बाइक का सीधे आयात किया जाता था. यहां तक कि होन्डा और यामाहा जैसी कंपनियां भी भारत की यूनिट में असेम्बलिंग नहीं करती थीं.

हार्ले के इस कदम के चलते भारत में कंपनी के लगभग 70 कर्मचारियों की नौकरी जाएगी। वहीं भारत के प्रबंध निदेशक संजीव राजशेखरन को कंपनी ने सिंगापुर ट्रांसफर कर दिया है। जहां वह एशिया के प्रमुख अधिकारी के तौर पर कार्य करेंगे। कंपनी के एक अनुमान के अनुसार इस कदम में 75 मिलियन डॉलर की पुनर्गठन लागत आएगी। जिसमें लगभग 3 मिलियन डॉलर की एकमुश्त राशि समाप्ति पर, लगभग 5 मिलियन डॉलर नॉन-करंट एसेस्ट एडजेस्टमेंट पर और 67 मिलियन डॉलर कॉन्ट्रैक्ट टर्मिनेशन की लागत शामिल हैं।

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